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मनरेगा से गांवों में विकास की नई धारा जल संरक्षण के 255 कार्यों से बदलेगी तस्वीर, रोज़ 20 हजार ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार

12.83 करोड़ से तालाब, डबरी और चेकडैम निर्माण; पलायन रुका, खेती को मिलेगा सहारा

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एमसीबी/27 मई 2026/ मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में मनरेगा अब सिर्फ मजदूरी देने वाली योजना नहीं, बल्कि गांवों में विकास और जल संरक्षण की मजबूत नींव बनती जा रही है। जिले में जल संकट से निपटने और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर जल संरक्षण कार्य शुरू किए गए हैं। जिले में वर्तमान समय में प्रतिदिन औसतन 20 हजार श्रमिक मनरेगा कार्यों में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। गांवों में ही रोजगार मिलने से मजदूरों का पलायन कम हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। प्रशासन का मानना है कि मनरेगा के माध्यम से अब गांव आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।

255 जल संरक्षण कार्यों को मिली स्वीकृति
भविष्य में संभावित जल संकट और गिरते भू-जल स्तर को ध्यान में रखते हुए जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े 255 रोजगारमूलक कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों पर कुल 12 करोड़ 83 लाख की राशि खर्च की जाएगी।
नव पदस्थ कलेक्टर के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इन कार्यों का उद्देश्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी परिसंपत्तियां तैयार करना है, जो आने वाले वर्षों में गांवों के लिए उपयोगी साबित हों

तालाब, खेत डबरी और चेकडैम से बढ़ेगा जलस्तर
स्वीकृत कार्यों में नए तालाब निर्माण, पुराने तालाबों का गहरीकरण, खेत तालाब, आजीविका डबरी, परकोलेशन टैंक, अर्दन चेकडैम और जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण शामिल है। इन संरचनाओं के निर्माण से वर्षा जल का बेहतर संरक्षण होगा और भू-जल स्तर में सुधार आने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में यह संरचनाएं खेती-किसानी के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगी।

खेती को मिलेगा नया सहारा
खेत तालाब और जल संरचनाओं से किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे फसल उत्पादन बढ़ेगा और खेती पर निर्भर परिवारों की आय में सुधार होगा। साथ ही गांवों में पेयजल संकट से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

महिलाएं भी बन रहीं आत्मनिर्भर
मनरेगा कार्यों में बड़ी संख्या में महिला श्रमिक भी जुड़ रही हैं। मजदूरी की राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से पारदर्शिता बढ़ी है और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

गुणवत्ता और समय-सीमा पर प्रशासन की नजर
जिला प्रशासन ने सभी जनपद पंचायतों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत कार्यों को गुणवत्ता और समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। निर्माण कार्यों में स्थानीय जरूरतों और पर्यावरण संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील
प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे मनरेगा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं और जल संरक्षण की इस मुहिम को जन आंदोलन का रूप दें।

गांवों की बदलती तस्वीर
मनरेगा के माध्यम से एमसीबी जिले में चल रहे ये प्रयास अब रोजगार, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का सफल मॉडल बनते जा रहे हैं। यह पहल साबित कर रही है कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन गांवों की तस्वीर और लोगों की जिंदगी दोनों बदल सकता है।

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