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लोक सेवा केन्द्रों का होगा उन्नयन अब “सेवा-सेतु केन्द्र” के रूप में मिलेंगी 442 डिजिटल नागरिक सेवाएं

राज्य शासन का बड़ा निर्णय, डिजिटल सुशासन को मिलेगा नया विस्तार

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एमसीबी/18 मई 2026/ राज्य शासन द्वारा प्रदेश में डिजिटल नागरिक सेवाओं को और अधिक सशक्त, व्यापक एवं प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वर्तमान में संचालित सभी लोक सेवा केन्द्रों का उन्नयन कर उन्हें अब “सेवा-सेतु केन्द्र” के रूप में संचालित किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को अधिकाधिक शासकीय सेवाएं एकीकृत डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराना तथा सेवा वितरण प्रणाली को अधिक सुगम, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है।

 

73 से बढ़कर अब 442 सेवाएं होंगी उपलब्ध

अब तक लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों को 73 प्रकार की सेवाएं प्रदान की जा रही थीं, लेकिन सेवा-सेतु केन्द्रों के रूप में उन्नयन के बाद यह संख्या बढ़ाकर 442 डिजिटल सेवाएं कर दी गई है। इससे आम नागरिकों को प्रमाण पत्र, पंजीयन, आवेदन, शासकीय योजनाओं एवं विभिन्न विभागीय सेवाओं का लाभ एक ही मंच पर अधिक व्यापक रूप में उपलब्ध हो सकेगा।

 

पूरे प्रदेश में एक समान पहचान होगी स्थापित

राज्य शासन ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी सेवा-सेतु केन्द्रों की एक समान पहचान सुनिश्चित की जाए। इसके तहत- प्रत्येक केन्द्र के मुख्य द्वार पर नया बोर्ड/ नाम पट्टिका लगाया जाएगा। सभी प्रदर्शित संदेशों एवं प्रचार सामग्री में निर्धारित सेवा-सेतु लोगो का उपयोग अनिवार्य होगा। पोर्टल, पावती (Receipts) एवं आधिकारिक पत्राचार में अब “लोक सेवा केन्द्र” के स्थान पर “सेवा-सेतु केन्द्र” शब्द का प्रयोग किया जाएगा।

 

सेवा प्रदाताओं को मिलेगा नया पदनाम

सेवा-सेतु पोर्टल संचालन हेतु अधिकृत सेवा प्रदाता अब “सेवा-सेतु प्रबंधक” कहलाएंगे, जिससे नई व्यवस्था को संस्थागत पहचान मिलेगी।

 

जन-जागरूकता पर विशेष जोर

राज्य शासन ने जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी (DeGS) को निर्देशित किया है कि विस्तारित डिजिटल सेवाओं के संबंध में स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि नागरिकों को नई सेवाओं की जानकारी मिल सके।

 

इसके लिए-

स्थानीय प्रचार अभियान

जिला स्तरीय वेबसाइटों पर सूचना प्रसार

निर्धारित दिशा-निर्देशों के अंतर्गत DeGS निधि का उपयोग

15 दिवस में मांगी गई कार्यवाही रिपोर्ट

सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि सेवा-सेतु केन्द्रों के परिवर्तित स्वरूप, बोर्ड, नाम पट्टिका एवं अन्य आवश्यक सुधारों की कार्यवाही पूर्ण कर 15 दिवस के भीतर फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट संबंधित कार्यालय को प्रेषित की जाए।

डिजिटल सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

यह निर्णय प्रदेश में ई-गवर्नेंस को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है। सेवा-सेतु केन्द्रों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को अधिक सुविधाजनक, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं प्राप्त होंगी। इससे शासन और नागरिकों के बीच डिजिटल संपर्क और अधिक मजबूत होगा। “सेवा-सेतु केन्द्र” केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि नागरिक सेवाओं के विस्तार, तकनीकी सशक्तिकरण और सुशासन की नई कार्य संस्कृति की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है, जो प्रदेश में डिजिटल इंडिया की अवधारणा को जमीनी स्तर पर और मजबूत करेगा।

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