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पोड़ी क्षेत्र में अवैध रेत, कोयला और नशे के व्यापार के खिलाफ पत्रकारों ने दिया मुख्यमंत्री को ज्ञापन

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एमसीबी/चिरमिरी (छत्तीसगढ़)।चिरमिरी प्रवास के दौरान आयोजित ‘सुशासन त्यौहार’ के बीच क्षेत्र में कानून व्यवस्था और प्रशासन की पोल खोलती एक सनसनीखेज शिकायत मुख्यमंत्री के समक्ष पहुंची है। स्थानीय निर्भीक पत्रकारों ने एक संयुक्त ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री को पोड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फल-फूल रहे अवैध कोयला उत्खनन, अवैध रेत परिवहन और नशीली पदार्थों के बेखौफ व्यापार से अवगत कराया है।

बंद माइंस और वन क्षेत्र में दिन-रात खुदाई

शिकायत के अनुसार, पोड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नंबर 7 के बंद पड़े माइंस और वन विभाग के आरक्षित क्षेत्रों में कोल माफिया सक्रिय हैं। यहाँ बड़े पैमाने पर अवैध कोयला उत्खनन किया जा रहा है। माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि दिन-रात ट्रैक्टरों के माध्यम से कोयले का अवैध परिवहन किया जा रहा है।

 

‘ऊपर रेत, नीचे कोयला’ – तस्करी का नया पैंतरा

पकड़े जाने के डर से बचने के लिए तस्करों ने एक नया तरीका निकाला है। ट्रैक्टर-ट्रॉली में नीचे अवैध कोयला भरकर ऊपर से रेत की परत बिछा दी जाती है, जिससे स्थानीय पुलिस और फॉरेस्ट गार्ड समेत आम लोगों की आंखों में आसानी से धूल झोंकी जा सके। यह अवैध कोयला बेधड़क तरीके से चित्ता झोर समेत  कई ईंट भट्टों में खपाया जा रहा है।

 

संरक्षण का खेल: शिकायतें बेअसर

पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि इस अवैध कार्य की मौखिक और लिखित शिकायतें कई बार संबंधित उच्च अधिकारियों को दी गईं, लेकिन आज तक कोई ठोस संज्ञान नहीं लिया गया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे काले कारोबार को कुछ बीट गार्ड और पोड़ी थाने के निचले कर्मचारियों का मूक संरक्षण प्राप्त है। इसके अलावा, माफियाओं को राजनीतिक शह मिलने की बात भी सामने आई है। माफिया खुलेआम दावा करते हैं कि “हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, हम सबको सेवा शुल्क दे रहे हैं।”

 

पत्रकारों को जान से मारने की धमकी

जब स्थानीय पत्रकार इस अवैध गतिविधि का समाचार संकलन (कवरेज) करने के लिए जंगल क्षेत्र में जाते हैं, तो कोल माफियाओं द्वारा उन पर हमला करने, ट्रैक्टर से कुचलने और झूठे मामलों में फंसाने की गंभीर धमकियां दी जा रही हैं। इसके बावजूद थाना स्तर पर कोई सुरक्षात्मक या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे पत्रकारों में भारी आक्रोश है।

बड़े हादसे की आशंका, सामाजिक माहौल खराब

अवैध और अंधाधुंध खुदाई के कारण जंगल और पोड़ी क्षेत्र में बड़े-बड़े और गहरे गड्ढे बन चुके हैं। भविष्य में यहाँ किसी भी वक्त कोई गंभीर दुर्घटना या जनहानि हो सकती है, जिसके लिए पत्रकारों ने सीधे तौर पर शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही, पोड़ी क्षेत्र में नशीले पदार्थों का व्यापार भी चरम पर है, जो स्थानीय युवाओं के भविष्य और सामाजिक वातावरण को पूरी तरह से दूषित कर रहा है।

 

मांग: पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच दल गठित करने तथा दोषी अधिकारियों व माफियाओं के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

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