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किशोर न्याय बोर्ड एवं जिला बाल संरक्षण इकाई की संयुक्त टीम ने किया उपजेल मनेन्द्रगढ़ का निरीक्षण

किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन की हुई समीक्षा, उपजेल में विधि से संघर्षरत कोई भी बालक नहीं मिला

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एमसीबी/15 जुलाई 2026/ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विधि से संघर्षरत बालकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को मनेन्द्रगढ़ स्थित उपजेल का संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी विधि से संघर्षरत बालक को वयस्क बंदियों के साथ न रखा जाए तथा किशोर न्याय अधिनियम के सभी प्रावधानों का पूर्णतः पालन किया जा रहा है।

निरीक्षण दल में किशोर न्याय बोर्ड (जे.जे.बी.) की सदस्य श्रीमती पुष्पा गुलकरी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुश्री कोमल सिंह, विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी सुश्री साक्षी जायसवाल, सामाजिक कार्यकर्ता श्री रामयज्ञ साहू एवं श्री अनिकेत ठाकुर शामिल रहे। टीम ने उपजेल मनेन्द्रगढ़ पहुंचकर जेल प्रबंधन से विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा विभिन्न अभिलेखों एवं व्यवस्थाओं का अवलोकन किया निरीक्षण के दौरान उपजेल में निरुद्ध बंदियों की संख्या, उनकी श्रेणी तथा विधि से संघर्षरत बालकों की उपलब्धता का विशेष रूप से सत्यापन किया गया। निरीक्षण के समय उपजेल मनेन्द्रगढ़ में कुल 131 बंदी निरुद्ध पाए गए। गठित टीम द्वारा किए गए सत्यापन एवं अभिलेखों के परीक्षण में यह पाया गया कि उपजेल में विधि से संघर्षरत किसी भी बालक को निरुद्ध नहीं रखा गया है।

टीम ने निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन से यह भी सुनिश्चित किया कि यदि भविष्य में किसी विधि से संघर्षरत बालक को अभिरक्षा में लिया जाता है, तो किशोर न्याय अधिनियम एवं संबंधित नियमों के अनुरूप निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए उसे सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए तथा बालकों के अधिकारों एवं सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो। निरीक्षण के दौरान जेल परिसर की व्यवस्थाओं, सुरक्षा व्यवस्था एवं अभिलेखों का भी अवलोकन किया गया। अधिकारियों ने जेल प्रशासन के साथ आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा करते हुए बाल संरक्षण से संबंधित प्रावधानों के प्रभावी पालन पर बल दिया। साथ ही किशोर न्याय प्रणाली के तहत बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

निरीक्षण दल ने बताया कि ऐसे नियमित निरीक्षणों का उद्देश्य किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिस्थिति में विधि से संघर्षरत बालकों के अधिकारों का उल्लंघन न हो। जिला प्रशासन एवं जिला बाल संरक्षण इकाई बच्चों के अधिकारों के संरक्षण तथा बाल हितों की सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। निरीक्षण उपरांत गठित टीम ने अपनी कार्यवाही सफलतापूर्वक पूर्ण करते हुए नियमानुसार निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार किया।

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